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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च 2021

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च 2021 का कार्यक्रम की आख्या

उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद्; बाल भवन में 8 मार्च 2021 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस बहुत ही हर्षउल्लास के साथ मनाया गया। इसमें "बाल भवन" के आस-पास रायपुर ब्लाॅक की रहने वाली महिलाओं, युवतियों और छोटे बच्चों ने भी भाग लिया। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस सम्मान समारोह की मुख्य अतिथि (से0नि0 आई.ए.एस.)श्रीमती ऊषा शुक्ला थी और समारोह की अध्यक्षता परिषद् के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा0 आई.एस.पाल द्वारा की गई।

सर्वप्रथम महिलाओं का स्वागत् कर मुख्य अतिथि श्रीमती ऊषा शुक्ला व डा0 आई.एस. पाल, परिषद् उपाध्यक्ष श्रीमती मधु बेरी, भूपेष जोशी, महासचिव श्रीमती पुष्पा मानस, व पूर्व महासचिव श्री बी0के0 डोभाल द्वारा द्वीप प्रज्जवलित किया गया।

महासचिव श्रीमती पुष्पा मानस द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों और कब से मनाया जाने लगा इस पर विस्तार से बताकर महिलाओं को स्वयं के प्रति जागरूक और सजग होने के लिए प्रेरित किया गया।
शार्प मेमोरियल स्कूल फाॅर ब्लाइंड की छात्राओं ने ढोलक, हारमोनियम बजाकर महिलाओं के लिए स्वागत् गान एवं प्रेरणादायक गीत गाया व वरिष्ठ वैज्ञानिक  परिषद् के पूर्व महासचिव श्री बी0के0 डोभाल द्वारा भारतवर्ष  में महिला दिवस मनाने का इतिहास और वर्तमान  जीवन के क्षेत्रों में उत्कृष्ठ कार्य कर इतिहास रच विभिन्न महिलाओं के चित्र दिखाकर बताया गया, केन्द्र सरकार ने महिलाओं के विकास व उत्थान के लिए लिए कौन-कौन सी योजनाऐं बनाई गयी है, पर विस्तार से बताया साथ ही साथ  उत्तराखण्ड़ सरकार द्वारा प्रदेश में  महिलाओं के प्रगति, विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए किये जा रहे कार्यो एवं योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

श्रीमती पुष्पा मानस ने आमंत्रित महिलाओं को अपने व्यक्तिगत् स्वास्थ्य व स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने हेतु अनुरोध किया। शिक्षा सभी बुराइयों को पराजित करती है इसलिए प्रत्येक बेटी का शिक्षित होना आवश्यक है। महिला परिवार की धूरी है महिलाओं ने, महिलाओं के लिए आज की स्थिति बनाने के लिए कड़ा संघर्ष किया है।

परिषद् द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक कठिनाइयों के बावजूद महिलाओं एवं बालिकाओं के  लिए, निरन्तर कार्य कर रहे चार महिलाओं को सम्मानित किया।

श्रीमती सन्तोष गोयल

आपका जन्म 13 अगस्त 1947 को हुआ।

शैक्षिक अहर्तायें - एम0ए0 (अंग्रेजी साहित्य) बी0एड0। शिक्षा:- हैदराबाद, रूड़की और देहरादून में हुयी।

1972-2000 तक भवानी बालिका इण्टर कालेज बल्लुपूर में अंग्रेजी प्रवक्ता, 2008 में  प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृृत, 30 वर्ष तक कालेज गाइड कैप्टेन। गाइडस के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त, गुजराती एवं बंगला भाषा में भारतीय भाषा केन्द्र से डिप्लोमा।

अवकाश प्राप्त अध्यापक संघ में उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय महिला आश्रम, लक्ष्मण चैक देहरादून में 10 वर्ष तक मंत्री के दायित्व का निर्वहन, 2008 से वर्तमान तक आश्रम की कक्षा 11वी. व 12वी. की छात्राओं को निःशुल्क अंग्रेजी प्रशिक्षण कार्य। सम्मान - भारत विकास परिषद, लायेन्स क्लब, उमा इनरहील क्लब द्वारा सम्मानित। श्रीमती गोयल की वर्ता बहुत सादगीभरी व सभी को प्रेरणा देने वाली रही।
श्रीमती गोयल की इस निः स्वार्थ सेवा के लिए आज बाल कल्याण परिषद् श्रीमती गोयल को सम्मानित कर गर्व महसूस करती है।

सुमाना सेमुअल

शार्प मेमोरियल फार ब्लाइन्ड़ में 1886 से आजतक लगभग 36 वर्ष से कार्यरत् रहकर अध्यापन व छात्राओं की उचित देखाभाल।  जीवन के प्रारम्भ में नर्सिग हेतु प्रशिक्षित होकर नर्स का कार्य किया ैचमबपंस म्कनबंजपवद में एम.ए., 51 बच्चियों की नेत्र सर्जरी कराकर, उन्हें प्रिन्ट को पढ़ने लिखने योग्य बनाया तथा बहुत सारे कम दृष्टिहीन अध्यापक एवं कार्य कत्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। शार्प मेमोरियल स्कूल फार ब्लाइंड के बच्चे प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तरीय पेन्टिंग प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त कर स्कूल व उत्तराखण्ड़ की गरिमा बढ़ाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर विजयी बच्चों की पेन्टिंग कार्ड के रूप में उत्तराखण्डत्र बाल कल्याण परिषद् देहरादून द्वारा मुद्रित कर विक्रय की जाती है। विजयी छात्रों को कक्षा 12 तक अध्ययन के लिए भारतीय बाल कल्याण परिषद् नई दिल्ली द्वारा ैचवदेवतेीपच  दी जाती है।  सुमाना सेमुअल पूर्ण रूप से इन दृष्टिहीन, कम रोशनी वाले बच्चों की पढ़ाई व उन्के कौशल विकास के लिए पूर्ण रूप से समर्पित हैं। सोमाना जी द्वारा की गई वर्ता सभी उपस्थित कलियांे को भावविहीन कर गई

उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद् को सुमाना सेमुअल जी द्वारा किये गये कार्यो पर गर्व है और परिषद् द्वारा इस निः स्वार्थ भाव से की गई उनकी सेवा के लिए महिला दिवस के इस अवसर पर उन्हें सम्मानित कर गर्व महसूस करती है।

सुश्री शोभा बहन

इनका जन्म 18 अप्रैल 1942 को रानीखेत, अल्मोड़ा में हुआ, पिता स्वः श्री मोहन राम विद्यार्थी प्रसिद्ध गांधीवादी थे, स्वः श्री मोहन राम विद्यार्थी ने शोभा बहन को कौसानी स्थित लक्ष्मी आश्रम में शिक्षा दिक्षा दिलवाई।
1953 में सुश्री शोभा जी स्व0 सरला बहन के सम्पर्क में आयी, चार साल के अध्ययन के बाद सुश्री शोभा बहिन पढ़ाई में इतनी पारंगत हो गई कि अन्य बालिकाओं को पढ़ाने लगी। 1958 में उत्तर बुनियादी स्वालम्बन शिक्षा ग्रहण की जिसमें 8 घण्टे शरीरिक कार्य एवं 2 घन्टें बौद्धिक कार्य किया जाता था। 1959 में इन्दौर जिले में खादी कमिशन मंे चरखा चलाकर सूत कातने का ढाई साल का प्रशिक्षण प्राप्त किया। भू-दान आन्दोलन के समय सुश्री शोभा बहिन ने आचार्य विनोवा भावे के साथ भी कार्य किया।  कर्थी गाॅव मंे शराब बंदी आन्दोलन का संचालन किया और इसमंे उन्हे काफी सफलता भी प्राप्त हुयी।

1986 में धरमघर, पिथौरागढ़ स्थित सरला कुटी के संरक्षण में शिशु केन्द्र खोले जिसमें प्रत्येक घर से एक मुट्ठी अनाज शिक्षिका के लिए वेतन के लिए लिया। बाद में दिल्ली की हिमालय सेवा संघ से पहले पचास रूपये प्रति अध्यापिका फिर सौ रूपये और बाद में एक सौ पचास रूपये आर्थिक मद्द इन शिशु केन्द्रों को मिली। 1993-94 से मीरा बहन समाज सेवी द्वारा इन शिशु केन्द्रों को आर्थिक सहायता दी जाने लगी। वर्ष 2004 से भारतीय बाल कल्याण परिषद्, नई दिल्ली व उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद् के सहयोग से सुश्री शोभा बहन द्वारा जनपद बागेश्वर व पिथौरागढ़ में हिम दर्शन कुटीर सरला आश्रम के माध्यम से  26 शिशु-गृहों का संचालित किया गया। जिलाधिकारी बागेश्वर व जिलाधिकारी पिथौरागढ़ द्वारा इन केन्द्रों के संचालन की प्रशंसा की गई। वर्ष 2014 से 31 दिसम्बर 2016 तक पुनः 20 शिशु केन्द्र सुश्री शोभा बहन के संरक्षण मंे बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपद में संचालित किये गये।

भारतीय बाल कल्याण परिषद्, नई दिल्ली द्वारा सुश्री शोभा बहन को अनकी निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। सुश्री शोभा बहन आज भी अपनी शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद समाज सेवा विशेष रूप से बालिकाओं, महिलाओं के विकास उत्थान व सशक्तिकरण के लिए निरन्तर कार्यरत हैं। सभी उपस्थित जन यह जानकर बहुत प्रेरित हुए।

उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद्् सुश्री शोभा बहन की इस दीर्घ समाज सेवा को नमन करते हुए सम्मानित करती हैं।

श्रीमती अल्का चैहान

नन्ही दुनियाँ वधिर विद्यायल 18 कालीदास मार्ग देहरादून में गत् 38 वर्षो से मूक-बधिर बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर रही हैं। सामान्य बच्चों को ढ़ंग से पढ़ाना एक कठिन कार्य माना जाता हैं। अध्यापन में लक्ष्य की प्राप्ति तभी होती है जब शिक्षा ग्रहण करने वाला छात्र भी पूर्ण मनोयोग से शिक्षा को ग्रहण करें।

ऐसी स्थिति में मूक-बधिर बच्चों को न केवल शिक्षा, ज्ञान देना अपितु खेल-कूद, चित्रकला प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग कराना श्रीमती अल्का चैहान का निरन्तर ध्येय रहा है। नन्ही दुनिया स्कूल के विद्यार्थी उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद् द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता व अन्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त करते हैं तथा राज्य स्तर पर भी  माननीय राज्यपाल महोदय् द्वारा भी इन्हें सम्मानित किया जाता हैं। श्रीमती अल्का चैहान बड़े धैर्य व कुशलता के साथ बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए निरन्तर कटिबद्ध हैं। अल्का चैहान के वर्ता से उपस्थित महिलायें बहुत प्रभावित हुयी।

उत्तराखण्ड़ राज्य बाल कल्याण परिषद् इनकी कर्मठता एवं लगनशीलता को नमन करते हुए महिला दिवस के अवसर पर आपको सम्मानित करती हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस आयोजन में लगभग 60 से 70 महिलाऐं एवं 40 से 50 युवतियाॅ व बच्चें उपस्थित रही। उक्त सभी को परिषद् द्वारा जलपान में पौकोड़ी/चाय/चिप्स/ब्रेड़ पकोडे़/विस्किट आदि देकर, महासचिव द्वारा सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आयोजन का समापन्न किया गया।

 

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